Friday, May 15, 2020

देव शरण शास्त्री की नई कविता

इस कविता में हर भारतीय को आई मुसीबतों से लड़ने की प्रेरणा दी गई है और नई आशाओं को जगाने का प्रयास किया गया है।

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क्यूँ  डरा हुआ सहमा सा लाचार है तू ,

इस धरती पर ईश्वर का भेजा अवतार है तू।

गीता उपदेश और गुरुवाणी के रहते ,

क्यूँ मुसीबतों से लड़ने को नहीं तैयार है तू ?

देश की परेशानीयां क्या भागने से घटेंगी ,

क्या फिर कायर कहलाने का हकदार है तू ?

अन्धेरा कब सूरज का रास्ता रोक सका ,

बस दूर इस उजाले से कदम चार है तू।

वो भयानक दौर न रहा,तो यह भी गुज़र जायेगा ,

विज्ञान ,शक्ति , भक्ति से बना उपहार है तू।

 

- देव शरण -


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